मुलेठी की खेती

खस की वैज्ञानिक खेती

परिचय

खस मूलत: भारतीय उपमहाद्वीप का पौधा है। इसका उपयोग मूलत: तेल की प्राप्ति हेतु किया जाता है। जोकि खस के पौधे की जड़ों में पाया जाता है। खस के तेल में प्रमुख घटक वेटीवरौल है जो 55-75% तक पाया जाता है। तेल का उपयोग सुगंधित सुपारी निर्माण, परफ्यूमरी तथा शर्बत आदि में किया जाता है। खस की जड़ों से तेल निकालने के बाद जो घास बचता है उससे खिड़की एवं कुलर के पर्दे बनाये जाते हैं। खस की खेती मुख्यत: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश तथा झारखण्ड में किया जाता है।

 

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जायेफल की खेती

जायफल

माइरीस्टिका फ्रैगरेन्स (कुल: माइरीस्टिकेसिया) जायफल तथा जावित्री नामक दो अलग-अलग मसाले उत्पन्न करता है। शुष्क बीज का दाना तथा उसके चारों और लिपटी शुष्क वेज चोल, जावित्री होती है। जायफल मौलुकस दीप (इंडोनेशिया) मूल का है। इंडोनेशिया विश्व का 50%जायफल एवं जावित्री का निर्यात करता है। ग्रीनेडा विश्व में द्वितीय नंबर का जायफल एवं जावित्री का निर्यात करने वाला देश है। भारत में यह मुख्यतः केरल के त्रिशोर,एरनाकुलम तथा कोट्टयम जिले तथा तमिलनाडू के कन्याकुमारी तथा तिरुनेलवेल्ली के कुछ भागों में इसका उत्पादन होता है।

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इमली की खेती

इमली को भारतीय खजूर से भी जाना जाता है। इमली के लिए अर्ध-शुष्क, उष्णकटिबंधीय परिस्थितियों की आवश्यकता होती है।इसकी खेती बिहार, उड़ीसा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और निचले हिमालय में होती है। इसके फल खट्टे होने के साथ साथ लाल एवं भूरे रंग में पाए जाते है। इमली कई तरह के औषधीय गुणों से भरपूर होती है जैसे की कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैगनीज और फाइबर। यह विटामिन सी, ई और बी का अच्छा स्त्रोत मानी जाती है। Read : इमली की खेती about इमली की खेती

केसर की खेती

केसर

केसर (saffron) एक सुगंध देनेवाला पौधा है। इसके पुष्प की वर्तिकाग्र (stigma) को केसर, कुंकुम, जाफरान अथवा सैफ्रन (saffron) कहते हैं। यह इरिडेसी (Iridaceae) कुल की क्रोकस सैटाइवस (Crocus sativus) नामक क्षुद्र वनस्पति है जिसका मूल स्थान दक्षिण यूरोप है, यद्यपि इसकी खेती स्पेन, इटली, ग्रीस, तुर्किस्तान, ईरान, चीन तथा भारत में होती है। भारत में यह केवल जम्मू (किस्तवार) तथा कश्मीर (पामपुर) के सीमित क्षेत्रों में पैदा होती हैं। प्याज तुल्य इसकी गुटिकाएँ (bulb) प्रति वर्ष अगस्त-सितंबर में रोपी जाती हैं और अक्टूबर-दिसंबर तक इसके पत्र तथा पुष्प साथ निकलते हैं। Read : केसर की खेती about केसर की खेती

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