बबूल की खेती

देवदार की खेती

देवदार वृक्ष कहा  बढ़ता है

 

वैज्ञानिक-वनस्पतिशास्त्रियों ने चार प्रकार के देवदार में भेद किया:

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टिंडे की खेती

धतूरा की खेती

धतूरा

भूमि एवं जलवायुः किसी भी प्रकार की जमीन या जलवायु में यह पौधा पनप जाता है । फसल हेतु हल्की परती जमीन का 

इस्तेमाल करना चाहिए । खुली तथा अच्छे प्रकाशवाली जगह इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है ।

भूमि की तैयारीः बखर चलाकर मिट्टी थोड़ी पोली करनी चाहिए । अगर उपलब्ध है तो प्रति एकड़ 2॰3 टन सड़ी हुई गोबर खाद डालनी चाहिए । प्रति एकड़ 25 किलो नत्रजन 15 किलो स्फुरद और 12 किलो पोटाष छिड़कना चाहिए ।

उन्नत प्रजातियां आर आर एल परपल आर आर एल ग्रीन । Read : धतूरा की खेती about धतूरा की खेती

चमेली की खेती

चमेली 

चमेली का फूल झाड़ी या बेल जाति से संबंधित है, इसकी लगभग २०० प्रजाति पाई जती हैं। "चमेली" नाम पारसी शब्द "यासमीन" से बना है, जिसका मतलब "प्रभु की देन" है।

चमेली, जैस्मिनम (Jasminum) प्रजाति के ओलिएसिई (Oleaceae) कुल का फूल है। भारत से यह पौधा अरब के मूर लोगों द्वारा उत्तर अफ्रीका, स्पेन और फ्रांस पहुँचा। इस प्रजाति की लगभग 40 जातियाँ और 100 किस्में भारत में अपने नैसर्गिक रूप में उपलब्ध हैं। जिनमें से निम्नलिखित प्रमुख और आर्थिक महत्व की हैं: Read : चमेली की खेती about चमेली की खेती

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