गेहूं की अधिक उपज देने वाली किस्में

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अच्छी फसल लेने के लिए गेहूं की किस्मों का सही चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। विभिन्न अनुकूल क्षेत्रों में समय पर, तथा प्रतिकूल जलवायु, व भूमि की परिस्थितियों में, पक कर तैयार होने वाली, अधिक उपज देने वाली व प्रकाशन प्रभावहीन किस्में उपलब्ध हैं। उनमें से अनेक रतुआरोधी हैं। यद्यपि `कल्याण सोना' लगातार रोग ग्रहणशील बनता चला जा रहा है, लेकिन तब भी समय पर बुआई और सूखे वाले क्षेत्रों में जहां कि रतुआ नहीं लगता, अच्छी प्रकार उगाया जाता है। अब `सोनालिका' आमतौर पर रतुआ से मुक्त है और उन सभी क्षेत्रों के लिए उपयोगी है, जहां किसान अल्पकालिक (अगेती) किस्म उगाना पसन्द करते हैं। द्विगुणी बौनी Read : गेहूं की अधिक उपज देने वाली किस्में about गेहूं की अधिक उपज देने वाली किस्में

बीन्स की फलियों की खेती इस प्रकार

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बीन्स यानी फलियां लेगुमिनेसी परिवार से संबंध रखती है और अपने हरे फलियों के लिए देश भर में उपजाई जाने वाली सब्जी की एक बहुत महत्वपूर्ण फसल है। फलियों के पौधे में उपर चढ़ने की प्रवृत्ति भी पाई जाती है। भारत में इन फलियों का इस्तेमाल रोजमर्रा की सब्जियों में, मवेशियों के चारे के तौर पर और मिट्टी में सुधार के लिए भी किया जाता है। हरी फलियों की खेती उनके पूरी तरह पकने से पहले बीन्स के फली में रहते हुए की जाती है। यह दूसरी फली वाली सब्जियों के मुकाबले ज्यादा पोष्टिक होते हैं, यही वजह है कि स्थानीय बाजार में इनकी बहुत अच्छी मांग होती है। इस आलेख में भारत में होनेवाली फली (बीन्स) और फ्रेंच बीन्स के Read : बीन्स की फलियों की खेती इस प्रकार about बीन्स की फलियों की खेती इस प्रकार

आलू की खेती

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मौसम में बदलाव आते ही जम्मू संभाग के मैदानी इलाकों में आलू की खेती का सीजन शुरू हो जाएगा। आलू की बेहतर पैदावार के लिए किसानों को अभी से ही योजना बनाकर खेती की तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए, क्योंकि भूमि जितनी ज्यादा नरम होगी, जमीन के अंदर आलू की उतनी ज्यादा गांठें बनेगी और बढ़ेंगी। आलू उत्पादन के विशेषज्ञ यूएस सूदन का कहना है कि जम्मू में 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक आलू की बिजाई की जा सकती है, लेकिन डेढ़ माह पहले जमीन तैयार करने का काम शुरू हो जाना चाहिए। 90 से 120 दिनों में फसल तैयार हो जाती है।

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चन्दन की खेती

चन्दन

 

चन्दन का वृक्ष 

 

भारतीय चंदन (Santalum album) का संसार में सर्वोच्च स्थान है। इसका आर्थिक महत्व भी है। यह पेड़ मुख्यत: कर्नाटक के जंगलों में मिलता है तथा भारत के अन्य भागों में भी कहीं-कहीं पाया जाता है। भारत के 600 से लेकर 900 मीटर तक कुछ ऊँचे स्थल और मलयद्वीप इसके मूल स्थान हैं। Read : चन्दन की खेती about चन्दन की खेती

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