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अनानास की खेती करना

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अनानास

अनानास के लिये गर्म नमी वाली जलवायु उपयुक्त रहती है। इसके लिए 22 से 32 डिग्री से. तापक्रम उपयुक्त रहता है। दिन-रात के तापक्रम में कम से कम 4 डिग्री का अंतर होना चाहिए। रेतीली दोमट मिट्टी जिसका पीएच 5.0 से 6.0 के मध्य हो इसके लिये उपयुक्त रहती है।
– खेत तैयार करने के बाद खेत में 90 से.मी. दूरी पर 15 से 30 से.मी. गहरी खाईयां बना लें।
– रोपाई के लिये अनानास के सकर,स्लीप या अनानास का ऊपरी भाग उपयोग में लाया जाता है, लगाने के पूर्व इन्हें 0.2 प्रतिशत डाईथेन एम 45 के घोल से उपचारित कर लें।
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आलू की फसल के बाद करें मूंगफली की खेती

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आलू की फसल के बाद करें मूंगफली की खेती

हाथरस। रविवार को विकास खंड हाथरस के गांव परसारा में एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। यहां पर जायद में मूंगफली की वैज्ञानिक खेती करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। यहां पर आलू के खेत में बाजरा की फसल न करने की सलाह देते हुए, फसल चक्र अपनाने पर जोर दिया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ.श्यामसिंह ने किसानों को मूंगफली की खेती के बारे में वैज्ञानिक जानकारी देते हुए बताया कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए फसल चक्र अपनाना बेहद जरुरी है।

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एलोवेरा की खेती भी किसानों को लाभ देती

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एलोवेरा की खेती भी किसानों को लाभ देती

ग्वारपाठा, घृतकुमारी या एलोवेरा जिसका वानस्पतिक नाम एलोवेरा बारबन्डसिस हैं तथा लिलिऐसी परिवार का सदस्य है। इसका उत्पत्ति स्थान उत्तरी अफ्रीका माना जाता है। एलोवेरा को विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है, हिन्दी में ग्वारपाठा, घृतकुमारी, घीकुंवार, संस्कृत में कुमारी, अंग्रेजी में एलोय कहा जाता है। एलोवेरा में कई औषधीय गुण पाये जाते हैं, जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों के उपचार में आयुर्वेदिक एंव युनानी पद्धति में प्रयोग किया जाता है जैसे पेट के कीड़ों, पेट दर्द, वात विकार, चर्म रोग, जलने पर, नेत्र रोग, चेहरे की चमक बढ़ाने वाली त्वचा क्रीम, शेम्पू एवं सौन्दर्य प्रसाधन तथा सामान्य Read : एलोवेरा की खेती भी किसानों को लाभ देती about एलोवेरा की खेती भी किसानों को लाभ देती

आड़ू की खेती की जानकारी

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आडू के  पौधे उपजाऊ  भूमि पर  जो 2.5  से 3.0  मीटर तक  गहरी हो, जल निकास  का साधन  हो, अच्छी  तरह से  उगाये जा  सकते हैं। 
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आंवला की उन्नत किस्म से और औषधियो की खेती

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आवंला का फल विटामिन सी का प्रमुख स्रोत है, तथा शर्करा एवं अन्य पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. इसके फलो को ताजा एवं सुखाकर दोनों तरह से प्रयोग में लाया जाता है इसके साथ ही आयुर्वेदिक दवाओं में आंवला का प्रमुख स्थान है. यह भारत का ही देशज पौधा है. Read : आंवला की उन्नत किस्म से और औषधियो की खेती about आंवला की उन्नत किस्म से और औषधियो की खेती

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