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कपास की फसल पर कीटों के प्रकोप के समाधान पर काम कर रही है सरकार

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कपास की फसल पर कीटों के प्रकोप के समाधान पर काम कर रही है सरकार

सरकार गुजरात और आंध्र प्रदेश के कुछ भागों में बीटी प्रौद्योगिकी वाली कपास की फसलों को भी नुकसान पहुंचाने पिंक बॉलवार्म के प्रकोप का समाधान निकालने में लगी है। बीटी कपास की किस्मों की प्रतीष्ठा कीट प्रतिरोधी फसल की रही है। वर्ष 2006 में मोन्सेन्टो के द्वारा पेश किये गये बी टी कपास की दूसरी पीढ़ी की किस्म बॉलगार्ड टू को पिंक बॉलवार्म कीट का प्रतिरोधक माना जाता है।

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जौ की खेती : सीमित लागत अधिक मुनाफा

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जौ की खेती : सीमित लागत अधिक मुनाफा

भारत में जौ (बारले) की खेती प्राचीनकाल (9000 वर्ष पूर्व ) से होती आ रही है। भारत में धार्मिक रूप से जौ  का विशेष महत्व है । चैत्र प्रतिपदा से हिन्दू नववर्ष के प्रारंभ के साथ ही बड़े नवरात्र शुरू होते हैं। ये नौ दिन माता की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्रि में देवी की उपासना से जुड़ी अनेक मान्यताएं हैं और  उन्ही में से एक है नवरात्रि पर घर में जवारे या जौ लगाने की। नवरात्रि में जवारे इसलिए लगाते हैं क्योंकि माना जाता है कि जब शृष्टि की शुरूआत हुई थी तो पहली फसल जौ ही थी। इसलिए इसे पूर्ण फसल कहा जाता है। यह हवन में देवी-देवताओं को चढ़ाई जाती है । बसंत ऋतु  की पहली फसल  जौ ही होती Read : जौ की खेती : सीमित लागत अधिक मुनाफा about जौ की खेती : सीमित लागत अधिक मुनाफा

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नींबू की खेती की जानकारी

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नींबू की खेती

नीबू  छोटा पेड़ अथवा सघन झाड़ीदार पौधा है। इसकी शाखाएँ काँटेदार, पत्तियाँ छोटी, डंठल पतला तथा पत्तीदार होता है। फूल की कली छोटी और मामूली रंगीन या बिल्कुल सफेद होती है। प्रारूपिक (टिपिकल) नीबू गोल या अंडाकार होता है। छिलका पतला होता है, जो गूदे से भली भाँति चिपका रहता है। पकने पर यह पीले रंग का या हरापन लिए हुए होता है। गूदा पांडुर हरा, अम्लीय तथा सुगंधित होता है। कोष रसयुक्त, सुंदर एवं चमकदार होते हैं।
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फूलगोभी की खेती के लिए भूमि की तैयारी कैसे करें?

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फूलगोभी एक लोकपिय सब्जी है। उत्त्पति स्थान साइप्रस या इटली का भूमध्यसागरीय क्षेत्र माना जाता है। भारत में इसका आगमन मुगल काल में हुआ माना जाता है। भारत में इसकी कृषि के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल लगभग 3000 हेक्टर है, जिससे तकरीबन 6,85,000 टन उत्पादन होता है। उत्तर प्रदेश तथा अन्य शीतल स्थानों में इसका उत्पादन व्यपाक पैमाने पर किया जाता है। वर्तमान में इसे सभी स्थानों पर उगाया जाता है। फूलगोभी, जिसे हम सब्जी के रूप में उपयोग करते है, के पुष्प छोटे तथा घने हो जाते हैं और एक कोमल ठोस रूप निर्मित करते हैं। फूल गोभी में प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन ‘ए’, ‘सी’ तथा निकोटीनिक एसिड जैसे पोषक तत्व Read : फूलगोभी की खेती के लिए भूमि की तैयारी कैसे करें? about फूलगोभी की खेती के लिए भूमि की तैयारी कैसे करें?

पारंपरिक खेती छोड़, फूलगोभी ने बदली किसानों की आर्थिक स्थिति

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पारंपरिक खेती छोड़, फूलगोभी ने बदली किसानों की आर्थिक स्थिति

देवगढ़भीम क्षेत्र में फूलगोभी की फसल ने किसानों की आर्थिक दशा-दिशा बदल दी है। पिछले तीन-चार साल में इस क्षेत्र के कई किसानों ने गोभी की खेती करना शुरू किया था, अब यहां की फूलगोभी की खपत पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़, गुड़गांव सहित अन्य शहरों के नामी मॉल में भी हो रही है। देवगढ़ क्षेत्र के लसानी, ताल, कांकरोद, ईसरमंड, मदारिया, कालेसरिया, आंजना, दौलपुरा, कुंदवा, पारडी, सांगावास, मियाला भीम पंचायत समिति क्षेत्र की ठीकरवास, बरार ग्राम पंचायतों के गांवों के कई किसान फूलगोभी की खेती कर रहे हैं। फूलगोभी की खपत उत्तर भारत के शहरों में हो रही है। किसान बताते हैं कि हर साल इन शहरों से व्यापारी क्षेत्र में फ Read : पारंपरिक खेती छोड़, फूलगोभी ने बदली किसानों की आर्थिक स्थिति about पारंपरिक खेती छोड़, फूलगोभी ने बदली किसानों की आर्थिक स्थिति

संकर कपास की कृषि कार्यमाला

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कपास
  • यह गर्व का विषय है कि हम संकर कपास बीज उत्पादन में वि¶व में अग्रणी हैं। संकर कपास के जनक डा0 सी टी पटेल द्वारा वि¶व को संकर कपास एच -4 की सौगात दी गई । उत्तरोत्तर ¶ाोध द्वारा परिष्कृत की गई जातियों की वजह से वर्ष 2001-02 में हमारे प्रदे¶ा में कपास के अंतर्गत कुल पांच लाख पचास हजार हैक्टेयर क्षेत्र में से लगभग 35 प्रति¶ात संकर कपास बोया गया। अनुमानत: हमारी आव¶यकता लगभग 9 से 10 लाख किलो संकर बीज प्रतिवर्ष है।
    वर्तमान में बीज उत्पादन एवं बीज विक्रय नीति को परिष्कृत कर उच्च गुणवत्ता का बीज पर्याप्त मात्रा में, समय पर व उचित मूल्य में उपलब्ध कराना अत्याधिक आव¶यक है।
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कपास की खेती के लिए नया कीटनाशक

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कपास की खेती के लिए नया कीटनाशक

कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण रेशेदार फसल होने के साथ-साथ देश की कृषि और औद्योगिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कपड़ा उद्योग के लिए कपास रीढ़ की हड्डी के समान है। कपड़ा उद्योग में 70 प्रतिशत रेशे कपास के ही इस्तेमाल होते है और भारत से विदेशों को होने वाले कुल निर्यात में लगभग 38 प्रतिशत निर्यात कपास का होता है, जिससे देश को 42 हजार करोड़ रुपये मिलते है। कपास के उत्पादन की आधुनिक तकनीक में कीटों, रोगों और खरपतवार को रोकने के लिए भारी मात्रा में रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है।
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