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करेला की खेती

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करेला की खेती

करेला के लिए गर्म एवं आद्र जलवायु की आवश्यकता होती है करेला अधिक शीत सहन कर लेता है परन्तु पाले से इसे हानी होती है |
भूमि
इसको बिभिन्न प्रकार की भूमियों में उगाया जा सकता है किन्तु उचित जल धारण क्षमता वाली जीवांश युक्त हलकी दोमट भूमि इसकी सफल खेती के लिए सर्वोत्तम मानी गई है वैसे उदासीन पी.एच. मान वाली भूमि इसकी खेती के लिए अच्छी रहती है नदियों के किनारे वाली भूमि इसकी खेती के लिए उपयुक्त रहती है कुछ अम्लीय भूमि में इसकी खेती की जा सकती है पहली जुताई मिटटी पलटने वाले हल से करें इसके बाद 2-3 बार हैरो या कल्टीवेटर चलाएँ |
प्रजातियाँ:
पूसा 2 मौसमी
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पारंपरिक खेती छोड़, फूलगोभी ने बदली किसानों की आर्थिक स्थिति

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पारंपरिक खेती छोड़, फूलगोभी ने बदली किसानों की आर्थिक स्थिति

देवगढ़भीम क्षेत्र में फूलगोभी की फसल ने किसानों की आर्थिक दशा-दिशा बदल दी है। पिछले तीन-चार साल में इस क्षेत्र के कई किसानों ने गोभी की खेती करना शुरू किया था, अब यहां की फूलगोभी की खपत पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़, गुड़गांव सहित अन्य शहरों के नामी मॉल में भी हो रही है। देवगढ़ क्षेत्र के लसानी, ताल, कांकरोद, ईसरमंड, मदारिया, कालेसरिया, आंजना, दौलपुरा, कुंदवा, पारडी, सांगावास, मियाला भीम पंचायत समिति क्षेत्र की ठीकरवास, बरार ग्राम पंचायतों के गांवों के कई किसान फूलगोभी की खेती कर रहे हैं। फूलगोभी की खपत उत्तर भारत के शहरों में हो रही है। किसान बताते हैं कि हर साल इन शहरों से व्यापारी क्षेत्र में फ Read : पारंपरिक खेती छोड़, फूलगोभी ने बदली किसानों की आर्थिक स्थिति about पारंपरिक खेती छोड़, फूलगोभी ने बदली किसानों की आर्थिक स्थिति

पहाड़ी पर्यावरण में धान के बीजों का उत्पादन

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पहाड़ी पर्यावरण में धान के बीजों का उत्पादन

पहाड़ी पर्यावरण में धान के बीजों का उत्पादन

खेत का चुनाव, खेत की तैयारी और बीजों की बुआई

खेत का चुनाव, खेत की तैयारी और बीजों की बुआई

उपयुक्त खेत का चुनाव, उसकी तैयारी और सही बुआई कर पाना.

पहाड़ी पर्यावरण में, मुख्य खेत में बीजों को सीधे ही बोया जाता है.

 

धान के बीजों के उत्पादन के लिए, पर्याप्त रूप से उपजाऊ, चिकनी गीली बलुई मिट्टी, जिसकी पानी सोखने की क्षमता अधिक हो, को प्राथमिकता दी जाती है. खेत, जिसमे पिछले सालों में समान प्रजाति उगाई गई हो, बीजों के उत्पादन के लिए अच्छी मानी जाती है.

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अधिक उपज के लिए गेहूँ इस तरह उगाएं

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अधिक उपज के लिए गेहूँ इस तरह उगाएं
 
राजीव कुमार
गो0ब0पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पन्तनगर,
गेहूँ की उपज लगातार बढ रही है। यह वृध्दि गेहूँ की उन्नत किस्मों तथा वैज्ञानिक विधियों से हो रही है। यह बहुत ही आवश्यक है कि गेहूँ का उत्पादन बढाया जाय जो कि बढती हुई जनसंख्या के लिए आवश्यक है। गेहूँ की खेती पर काफी अनुसंधान हो रहा है और उन्नत किस्मों के लिए खेती की नई विधियां निकाली जा रही है। इसलिए यह बहुत ही आवश्यक है कि प्रत्येक किसान को गेहूँ की खेती की नई जानकारी मिलनी चाहिए जिससे वह गेहूँ की अधिक से अधिक उपज ले सके।
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संकर कपास की कृषि कार्यमाला

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कपास
  • यह गर्व का विषय है कि हम संकर कपास बीज उत्पादन में वि¶व में अग्रणी हैं। संकर कपास के जनक डा0 सी टी पटेल द्वारा वि¶व को संकर कपास एच -4 की सौगात दी गई । उत्तरोत्तर ¶ाोध द्वारा परिष्कृत की गई जातियों की वजह से वर्ष 2001-02 में हमारे प्रदे¶ा में कपास के अंतर्गत कुल पांच लाख पचास हजार हैक्टेयर क्षेत्र में से लगभग 35 प्रति¶ात संकर कपास बोया गया। अनुमानत: हमारी आव¶यकता लगभग 9 से 10 लाख किलो संकर बीज प्रतिवर्ष है।
    वर्तमान में बीज उत्पादन एवं बीज विक्रय नीति को परिष्कृत कर उच्च गुणवत्ता का बीज पर्याप्त मात्रा में, समय पर व उचित मूल्य में उपलब्ध कराना अत्याधिक आव¶यक है।
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कपास की खेती के लिए नया कीटनाशक

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कपास की खेती के लिए नया कीटनाशक

कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण रेशेदार फसल होने के साथ-साथ देश की कृषि और औद्योगिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कपड़ा उद्योग के लिए कपास रीढ़ की हड्डी के समान है। कपड़ा उद्योग में 70 प्रतिशत रेशे कपास के ही इस्तेमाल होते है और भारत से विदेशों को होने वाले कुल निर्यात में लगभग 38 प्रतिशत निर्यात कपास का होता है, जिससे देश को 42 हजार करोड़ रुपये मिलते है। कपास के उत्पादन की आधुनिक तकनीक में कीटों, रोगों और खरपतवार को रोकने के लिए भारी मात्रा में रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है।
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वैज्ञानिक तरीकों से करें कपास की खेती

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वैज्ञानिक तरीकों से करें कपास की खेती

रानीला गांव में कृषि विज्ञान केंद्र की तरफ से कपास ज्ञान दिवस मनाया गया, जिसमें 70 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में किसानों को कपास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दी।
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