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टमाटर की खेती के उन्नत तरीके

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टमाटर आमतौर पर ग्रीष्म ऋतु में होनेवाली फसल है। इसके लिए गर्म और नर्म मौसम की जरूरत है। टमाटर का पौधा ज्यादा ठंड और उच्च नमी को बर्दाश्त नहीं कर पाता है। ज्यादा रोशनी से इसकी रंजकता, रंग और उत्पादकता प्रभावित होता है। विपरीत मौसम की वजह से इसकी खेती बुरी तरह प्रभावित होती है। बीज के विकास, अंकुरण, फूल आना और फल होने के लिए अलग-अलग मौसम की व्यापक विविधता चाहिए। 10 डिग्री सेंटीग्रेड से कम तापमान और 38 डिग्री सेंटीग्रेड से ज्यादा तापमान पौधे के विकास को धीमा कर देते हैं। Read : टमाटर की खेती के उन्नत तरीके about टमाटर की खेती के उन्नत तरीके

अधिक उपज देने वाली मूंग की किस्म तैयार

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अधिक उपज देने वाली मूंग की किस्म तैयार

देश में दलहन की पैदावार न बढ़ने से दालों के आयात पर हमारी निर्भरता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में दलहनों की पैदावार बढ़ाने लिए अधिक उपज वाली किस्में विकसित करना जरूरी है। इसे देखते हुए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के जेनेटिक और प्लांट ब्रीडिंग विभाग ने मूंग की अधिक उपज वाली मालवीय जनकल्याणी (एचयूएम 16) नई किस्म विकसित की है। इस किस्म की खासियत है कि यह महज दो माह में पककर तैयार हो जाती है। किसान इसकी बुवाई गेहूं की कटाई के बाद यानी अप्रैल माह में भी कर सकते हैं। जिससे बरसात से पहले इसकी कटाई की जा सके। इस तरह इस किस्म की खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद है। इसके अलावा इस किस्म में अन्य किस्मों के Read : अधिक उपज देने वाली मूंग की किस्म तैयार about अधिक उपज देने वाली मूंग की किस्म तैयार

आलू की फसल को झुलसा रोग व कीट से बचाने के उपाय

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उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग ||प्रदेश में आलू के अच्छे उत्पादन हेतु सम-सामयिक महत्व के कीट/व्याधियों का उचित समय पर नियंत्रण नितान्त आवश्यक है। आलू की फसल पिछेती झुलसा रोग के प्रति अत्यन्त संवेदनशील होती है। प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदलीयुक्त बूंदा-बांदी एवं नाम वातावरण में झुलसा रोग का प्रकोप बहुत तेजी से फैलता है तथा फसल को भारी क्षति पहुँचती है। ऐसी परिस्थितियों में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उ0प्र0 द्वारा इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से आलू उत्पादकों को सलाह दी जाती है कि आलू की अच्छी पैदावार सुनिश्चित करने हेतु रक्षात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिये। यह जानकारी उद्यान निदेशक Read : आलू की फसल को झुलसा रोग व कीट से बचाने के उपाय about आलू की फसल को झुलसा रोग व कीट से बचाने के उपाय

मूंग की दो ऎसी प्रजातियां जो 55 दिन में ही तैयार होगी

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मूंग की दो ऎसी प्रजातियां विकसित की है जो 55 दिन में ही तैयार होगी

कानपुर। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईपीआर) के वैज्ञानिकों ने मूंग की दो ऎसी प्रजातियां विकसित की है जो 55 दिन में ही तैयार हो जाएगी। अभी तक मूंग की फसल पकने में कम से कम 70 दिन का समय लगता था। जिससे 40 फीसद फसल बारिश की वजह से खराब हो जाता था।

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सर्पगंधा की खेती के लिये आवश्यक बातें

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सर्पगंधा की खेती के लिये आवश्यक बातें

सर्पगंधा को विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है परंतु जैविक तत्व युक्त दोमट मिट्टी जिसमें पानी का निकास अच्छा हो उपयुक्त रहती है। मिट्टी का पी.एच. मान 4.6 से 6.2 के मध्य हो तो अच्छा है। पी.एच.मान 8.0 से अधिक न हो।
– आप सर्पगंधा-1 जाति लगा सकते हैं जो 18 महिने में प्राप्त हो जाती है और इसकी उपज लगभग 25 क्विंटल प्रति हेक्टर है।
– इसे बीज, जड़, तना, कटिंग द्वारा उगाया जा सकता है।
– बीजों से नर्सरी मई के मध्य में लगा लें बीजों को 6-7 से.मी. दूरी पर 1-2 से.मी. गहराई में बोयें। बोने के पूर्व बीजों को रात भर पानी में भिगा लें।
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करने के बाद रोयेदार इल्ली खपरा भृंग का आक्रमण

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 करने के बाद रोयेदार इल्ली खपरा भृंग का आक्रमण

पिछले वर्ष अच्छी तरह सुखा कर भंडारण करने के बाद भी रोयेदार इल्ली खपरा भृंग का आक्रमण हुआ था। कारण बतायें। Read : करने के बाद रोयेदार इल्ली खपरा भृंग का आक्रमण about करने के बाद रोयेदार इल्ली खपरा भृंग का आक्रमण

बिना मिट्टी के खेती लगाएं स्ट्राबेरी

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बिना मिट्टी के खेती लगाएं स्ट्राबेरी

अब वो समय आ गया है… जब वर्टिकल फार्मिंग दुनिया में छाने वाली है। आंधी तूफान आए… ओले पड़े… भारी बारिश हो जाए या फिर भीषण गर्मी हो… आप अपनी मनचाही सब्जी या फिर फलों की खेती कर सकेंगे अब मौसम कोई भी हो… आप हर तरह की फसल उगा पाएंगे। ये मुमकिन हुआ है… खेती की नई तकनीक के चलते जिसका नाम है हाइड्रोपोनिक कल्टीवेशन। इजराइल, जापान, चीन और अमेरिका आदि देशों के बाद अब भारत में भी यह तकनीक दस्तक दे चुकी है। इसकी सफलता को देखते हुए इंडोनेशिया, सिंगापुर, सऊदी अरब, कोरिया जैसे देशों से इस तकनीक की मांग तेजी से बढ़ रही है। किसान  इस तकनीक से स्ट्राबेरी, खीरा, टमाटर, पालक, गोभी, शिमला मिर्च जैसी सब्जियां उगा Read : बिना मिट्टी के खेती लगाएं स्ट्राबेरी about बिना मिट्टी के खेती लगाएं स्ट्राबेरी

गेहूं को भंडारण में रखने के लिये उपयुक्त दशा क्या होनी चाहिए ताकि कीट न लगें।

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गेहूं को भंडारण

गेहूं तथा अन्य अनाजों के भंडारण में कीटों तथा सूक्ष्म जीवों के आक्रमण की संभावना बनी रहती है। इससे बचने के लिये निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
– अनाज में भंडारण के पूर्व नमी 10 प्रतिशत से कम रहनी चाहिए। अधिक नमी में अनाज में कीट तथा फफूंद का प्रकोप होने की संभावना हमेशा बनी रहेगी। इसलिये आप गेहूं को अच्छी तरह सुखा लें सूखने के बाद यदि दाना दांतों से दबाने पर कट्ट की आवाज के साथ टूटे तो समझ लीजिए की वह पूरी तरह सूख गया है और संग्रहण के लायक है। अधिकांश कीट अनाज की 10 प्रतिशत नमी में नहीं पनप पाते हैं।
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अब आ गया है समय जायद में मूंग लेने का

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अब आ गया है समय जायद में मूंग लेने का

जलवायु
मूंग की खेती खरीफ एवं जायद दोनों मौसम में की जा सकती है। फसल पकते समय शुष्क जलवायु की आवश्यकता पड़ती है। खेती हेतु समुचित जल निकास वाली दोमट तथा बलुई दोमट भूमि सबसे उपयुक्त मानी जाती है, लेकिन जायद में मूंग की खेती में अधिक सिंचाई करने की आवश्यकता होती है।
भूमि का चुनाव एवं तैयारी
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