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सर्पगंधा की खेती के लिये आवश्यक बातें

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सर्पगंधा की खेती के लिये आवश्यक बातें

सर्पगंधा को विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है परंतु जैविक तत्व युक्त दोमट मिट्टी जिसमें पानी का निकास अच्छा हो उपयुक्त रहती है। मिट्टी का पी.एच. मान 4.6 से 6.2 के मध्य हो तो अच्छा है। पी.एच.मान 8.0 से अधिक न हो।
– आप सर्पगंधा-1 जाति लगा सकते हैं जो 18 महिने में प्राप्त हो जाती है और इसकी उपज लगभग 25 क्विंटल प्रति हेक्टर है।
– इसे बीज, जड़, तना, कटिंग द्वारा उगाया जा सकता है।
– बीजों से नर्सरी मई के मध्य में लगा लें बीजों को 6-7 से.मी. दूरी पर 1-2 से.मी. गहराई में बोयें। बोने के पूर्व बीजों को रात भर पानी में भिगा लें।
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करने के बाद रोयेदार इल्ली खपरा भृंग का आक्रमण

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 करने के बाद रोयेदार इल्ली खपरा भृंग का आक्रमण

पिछले वर्ष अच्छी तरह सुखा कर भंडारण करने के बाद भी रोयेदार इल्ली खपरा भृंग का आक्रमण हुआ था। कारण बतायें। Read : करने के बाद रोयेदार इल्ली खपरा भृंग का आक्रमण about करने के बाद रोयेदार इल्ली खपरा भृंग का आक्रमण

बिना मिट्टी के खेती लगाएं स्ट्राबेरी

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बिना मिट्टी के खेती लगाएं स्ट्राबेरी

अब वो समय आ गया है… जब वर्टिकल फार्मिंग दुनिया में छाने वाली है। आंधी तूफान आए… ओले पड़े… भारी बारिश हो जाए या फिर भीषण गर्मी हो… आप अपनी मनचाही सब्जी या फिर फलों की खेती कर सकेंगे अब मौसम कोई भी हो… आप हर तरह की फसल उगा पाएंगे। ये मुमकिन हुआ है… खेती की नई तकनीक के चलते जिसका नाम है हाइड्रोपोनिक कल्टीवेशन। इजराइल, जापान, चीन और अमेरिका आदि देशों के बाद अब भारत में भी यह तकनीक दस्तक दे चुकी है। इसकी सफलता को देखते हुए इंडोनेशिया, सिंगापुर, सऊदी अरब, कोरिया जैसे देशों से इस तकनीक की मांग तेजी से बढ़ रही है। किसान  इस तकनीक से स्ट्राबेरी, खीरा, टमाटर, पालक, गोभी, शिमला मिर्च जैसी सब्जियां उगा Read : बिना मिट्टी के खेती लगाएं स्ट्राबेरी about बिना मिट्टी के खेती लगाएं स्ट्राबेरी

गेहूं को भंडारण में रखने के लिये उपयुक्त दशा क्या होनी चाहिए ताकि कीट न लगें।

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गेहूं को भंडारण

गेहूं तथा अन्य अनाजों के भंडारण में कीटों तथा सूक्ष्म जीवों के आक्रमण की संभावना बनी रहती है। इससे बचने के लिये निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
– अनाज में भंडारण के पूर्व नमी 10 प्रतिशत से कम रहनी चाहिए। अधिक नमी में अनाज में कीट तथा फफूंद का प्रकोप होने की संभावना हमेशा बनी रहेगी। इसलिये आप गेहूं को अच्छी तरह सुखा लें सूखने के बाद यदि दाना दांतों से दबाने पर कट्ट की आवाज के साथ टूटे तो समझ लीजिए की वह पूरी तरह सूख गया है और संग्रहण के लायक है। अधिकांश कीट अनाज की 10 प्रतिशत नमी में नहीं पनप पाते हैं।
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अब आ गया है समय जायद में मूंग लेने का

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अब आ गया है समय जायद में मूंग लेने का

जलवायु
मूंग की खेती खरीफ एवं जायद दोनों मौसम में की जा सकती है। फसल पकते समय शुष्क जलवायु की आवश्यकता पड़ती है। खेती हेतु समुचित जल निकास वाली दोमट तथा बलुई दोमट भूमि सबसे उपयुक्त मानी जाती है, लेकिन जायद में मूंग की खेती में अधिक सिंचाई करने की आवश्यकता होती है।
भूमि का चुनाव एवं तैयारी
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कपास की फसल पर कीटों के प्रकोप के समाधान पर काम कर रही है सरकार

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कपास की फसल पर कीटों के प्रकोप के समाधान पर काम कर रही है सरकार

सरकार गुजरात और आंध्र प्रदेश के कुछ भागों में बीटी प्रौद्योगिकी वाली कपास की फसलों को भी नुकसान पहुंचाने पिंक बॉलवार्म के प्रकोप का समाधान निकालने में लगी है। बीटी कपास की किस्मों की प्रतीष्ठा कीट प्रतिरोधी फसल की रही है। वर्ष 2006 में मोन्सेन्टो के द्वारा पेश किये गये बी टी कपास की दूसरी पीढ़ी की किस्म बॉलगार्ड टू को पिंक बॉलवार्म कीट का प्रतिरोधक माना जाता है।

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जौ की खेती : सीमित लागत अधिक मुनाफा

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जौ की खेती : सीमित लागत अधिक मुनाफा

भारत में जौ (बारले) की खेती प्राचीनकाल (9000 वर्ष पूर्व ) से होती आ रही है। भारत में धार्मिक रूप से जौ  का विशेष महत्व है । चैत्र प्रतिपदा से हिन्दू नववर्ष के प्रारंभ के साथ ही बड़े नवरात्र शुरू होते हैं। ये नौ दिन माता की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्रि में देवी की उपासना से जुड़ी अनेक मान्यताएं हैं और  उन्ही में से एक है नवरात्रि पर घर में जवारे या जौ लगाने की। नवरात्रि में जवारे इसलिए लगाते हैं क्योंकि माना जाता है कि जब शृष्टि की शुरूआत हुई थी तो पहली फसल जौ ही थी। इसलिए इसे पूर्ण फसल कहा जाता है। यह हवन में देवी-देवताओं को चढ़ाई जाती है । बसंत ऋतु  की पहली फसल  जौ ही होती Read : जौ की खेती : सीमित लागत अधिक मुनाफा about जौ की खेती : सीमित लागत अधिक मुनाफा

नींबू की खेती की जानकारी

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नींबू की खेती

नीबू  छोटा पेड़ अथवा सघन झाड़ीदार पौधा है। इसकी शाखाएँ काँटेदार, पत्तियाँ छोटी, डंठल पतला तथा पत्तीदार होता है। फूल की कली छोटी और मामूली रंगीन या बिल्कुल सफेद होती है। प्रारूपिक (टिपिकल) नीबू गोल या अंडाकार होता है। छिलका पतला होता है, जो गूदे से भली भाँति चिपका रहता है। पकने पर यह पीले रंग का या हरापन लिए हुए होता है। गूदा पांडुर हरा, अम्लीय तथा सुगंधित होता है। कोष रसयुक्त, सुंदर एवं चमकदार होते हैं।
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टमाटर की खेती की जानकारी

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टमाटर की खेती

टमाटर विश्व में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाली सब्जी है। इसका पुराना वानस्पतिक नाम लाइकोपोर्सिकान एस्कुलेंटम मिल है। वर्तमान समय में इसे सोलेनम लाइको पोर्सिकान कहते हैं। बहुत से लोग तो ऐसे हैं जो बिना टमाटर के खाना बनाने की कल्पना भी नहीं कर सकते। इसकी उत्पति दक्षिण अमेरिकी ऐन्डीज़ में हुआ। मेक्सिको में इसका भोजन के रूप में प्रयोग आरम्भ हुआ और अमेरिका के स्पेनिस उपनिवेश से होते हुये विश्वभर में फैल गया। Read : टमाटर की खेती की जानकारी about टमाटर की खेती की जानकारी

फूलगोभी की खेती के लिए भूमि की तैयारी कैसे करें?

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फूलगोभी एक लोकपिय सब्जी है। उत्त्पति स्थान साइप्रस या इटली का भूमध्यसागरीय क्षेत्र माना जाता है। भारत में इसका आगमन मुगल काल में हुआ माना जाता है। भारत में इसकी कृषि के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल लगभग 3000 हेक्टर है, जिससे तकरीबन 6,85,000 टन उत्पादन होता है। उत्तर प्रदेश तथा अन्य शीतल स्थानों में इसका उत्पादन व्यपाक पैमाने पर किया जाता है। वर्तमान में इसे सभी स्थानों पर उगाया जाता है। फूलगोभी, जिसे हम सब्जी के रूप में उपयोग करते है, के पुष्प छोटे तथा घने हो जाते हैं और एक कोमल ठोस रूप निर्मित करते हैं। फूल गोभी में प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन ‘ए’, ‘सी’ तथा निकोटीनिक एसिड जैसे पोषक तत्व Read : फूलगोभी की खेती के लिए भूमि की तैयारी कैसे करें? about फूलगोभी की खेती के लिए भूमि की तैयारी कैसे करें?

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