नींबू की खेती की जानकारी

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नींबू की खेती

नीबू  छोटा पेड़ अथवा सघन झाड़ीदार पौधा है। इसकी शाखाएँ काँटेदार, पत्तियाँ छोटी, डंठल पतला तथा पत्तीदार होता है। फूल की कली छोटी और मामूली रंगीन या बिल्कुल सफेद होती है। प्रारूपिक (टिपिकल) नीबू गोल या अंडाकार होता है। छिलका पतला होता है, जो गूदे से भली भाँति चिपका रहता है। पकने पर यह पीले रंग का या हरापन लिए हुए होता है। गूदा पांडुर हरा, अम्लीय तथा सुगंधित होता है। कोष रसयुक्त, सुंदर एवं चमकदार होते हैं।
बाग़ लगाने के लिए उचित दूरी पर 3 x 3 x 3 फीट आकर के गड्ढे खोद लिए जाते हैं. साधारणतः मौसम्बी संतरे के पौधे 5 x 4 मी. चकोतरे के 7 या 8 मी. एवं नींबू के 4-5 मी. दूरी पर लगाये जाते हैं. इन गड्ढों को मिट्टी के साथ 20-25 कि०ग्रा० गोबर की खाद मिलकर भर दिया जाता है. दीमक के प्रकोप से बचने हेतु प्रत्येक गड्ढे में 200 ग्राम क्लोरवीर की धुल डालें.

जो पौधे कलिकायन द्वारा तैयार किये जाते हैं वे लगभग एक साल में रोपाई योग्य हो जाते हैं, पौधे लगाने के लिए बरसात का मौसम अति उत्तम है. परन्तु मार्च एवं अप्रेल में भी पौधे सफलतापूर्वक लगाये जा सकते हैं.

पौधे लगाने से पहले प्रत्येक गड्ढे की मिट्टी में 20 कि०ग्रा० या एक टोकरी गोबर अथवा कम्पोस्ट खाद और एक किलो सुपर फ़ॉस्फ़ेट मिलाना लें अच्छा रहता है. रोपाई के बाद नीचे लिखे अनुसार उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए.

पूरी तरह विकसित और फल देने वाले वृक्षों के लिए प्रति पेड़ 60 किग्रा गोबर की खाद, 2.5 किग्रा. अमोनियम सल्फ़ेट, 2.5 किग्रा. सुपर फास्फेट और 1.5 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ़ पोटाश का प्रयोग करना चाहिए. उर्वरकों की उपरोक्त मात्र का उपयोग दो बराबर खुराकों में करें. पहली खुराक जनवरी से पहले दें, और दूसरी फल आने के बाद. दोनों बार उर्वरक देने के बाद सिंचाई करें. गोबर की खाद नवम्बर - दिसम्बर के महीनों में डालनी चाहिए.

सिंचाई

रोपाई के तुंरत बाद बाग़ की सिंचाई करें. छोटे पौधों 5 साल तक के पौधों की सिंचाई उनके आस-पास घेरा बनाकर की जा सकती है. जब कि पुराने पौधों के आस-पास पानी भरकर या नालियाँ बनाकर सिंचाई की जाती है. गर्मियों के मौसम में हर 10 या 15 दिन के अंतर पर और सर्दियों के मौसम में प्रति 4 सप्ताह बाद सिंचाई करनी चाहिए. बरसात के मौसम में सिंचाई की यदाकदा ही आवश्यकता होती है. इस मौसम में बरसात का अतिरिक्त पानी निकालने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए. सिंचाई करते समय ध्यान रखें कि सिंचाई का पानी पेड़ के मुख्य तने के संपर्क में न आए. इसके लिए मुख्य तने के आसपास मिट्टी की एक छोटी मंद बनायीं जा सकती है. ड्रिप सिचाई विधि सबसे अच्छी रहती है. इसके द्वारा पानी की बचत उर्वरको का उपयोग होता है, साथ बीमीरा कम आती है.

निराई - गुड़ाई

नींबू जाति के फलों वाले बागों को कभी भी गहरा नहीं जोता जान चाहिए. क्योंकि इन पेड़ों की जड़ें ज़मीन की उपरी सतह में रहती हैं और गहरी जुताई करने से उनके नष्ट होने का खतरा रहता है. बागों में खरपतवारों की रोकथाम की जाए तो ज्यादा अच्छा है. प्रति हेक्टेअर 7.5-10 किलो तक सिमेंजिन या 2.5 लीटर ग्रेमेक्सोन को 500 लीटर पानी में घोल कर छिड़कने से चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार तथा वार्षिक घासें नष्ट की जा सकती हैं.

पौधों की छंटाई

पौधों का अच्छा विकास हो इसके लिए उनकी छंटाई क्यारियों की अवस्था से ही शुरू हो जाती है. पौधे की लगभग सभी उपरी और बाहर निकलने वाली शाखाओं को काट दिया जाना चाहिए और इस प्रकार लगभग 45 से०मी० लम्बाई का साफ़ और सीधा तना ही रहने दिया जाना चाहिए. समय पर सभी रोग-ग्रस्त, टूटी हुई अनेकों शाखाओं वाली और सुखी लकडी वाली टहनियों को निकलते रहना चाहिए. जिस जगह पर कलि जोड़ी है उसके ठीक नीचे से निकलने वाली प्ररोहों को उनकी आरंभिक अवस्था में ही हवा देना चाहिए. जिन स्थानों पर शाखाएँ काटी गयी हों, वहां पर बोरोदोक्स नामक रसायन की लेई बना कर लगा दें. यह लेई एक कि०ग्रा० कॉपर सल्फ़ेट, 1.5 कि०ग्रा० बुझा चुना, और 1.5 लीटर पानी को मिलकर तैयार की जा सकती है.

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कागजी नींबू से आप 1 वर्ष में छोटे पौधे से 25 से 50 किलो तक और 5 वर्ष से अधिक उम्र के पौधे से 2 किलो तक प्रतिवर्ष फल प्राप्त कर सकते हैं कागजी नींबू का जो पौधा है 20 वर्षों तक बढ़िया क्वालिटी के फल आपको देता रहता है

*हाइब्रिड क्वालिटी के  नींबू के पौधों से आप  10 किलो से लेकर 30 किलो तक प्रतिवर्ष नींबू प्राप्त कर सकते हैं

*एक एकड़ क्षेत्र में कागजी नींबू के लगभग 200 पौधे लगाए जा सकते हैं 1 वर्ष में एक पौधे से 5000 रुपए की आमदनी आपको हो सकती है |

*इस प्रकार 10लाख  रुपए तक आप एक एकड़ क्षेत्र से आसानी से कमा सकते हैं अगर हम 2लाख  रुपय अपनी फसल का मेहनत का खर्चा निकाल भी दें  तब भी 7 से 8  लाख रुपय आप बड़ी आसानी से बचा सकते |

आमदनी का यह आंकड़ा क्षेत्र ,मौसम, उपज  आदि के आधार पर थोड़ा अलग  ( काम , ज्यादा  ) हो सकता है लेकिन फिर भी नींबू कि जो बागवानी है वह बहुत ही फायदेमंद खेती है बहुत कम नुकसान होने की संभावना है और बहुत अच्छे स्तर की बचत इस में होती है

बाजार –

नींबू का उत्पादन  जितना आसान है उतना ही इसे बेचना आसान है पूरे भारत में नींबू को आप अपनी लोकल सब्जी मंडियों में भी आसानी से बेच सकते हैं इसके अलावा भारत की राजधानी नई दिल्ली में आजादपुर मंडी में कोई  आसानी से बेचा जा सकता है   आप नींबू को किसी भी मौसम में बड़ी अच्छी कीमतों में देख सकते हैं |