उन्नत तरीके से करे गन्ने की खेती

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 भारत में गन्ने की खेती काफी बड़े स्तर पर की जाती है। इस लेख में आप जानेंगे कि किस तरह कम लागत में गन्ने की खेती कर आप अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।गन्ने की फसल को अच्छे से बढ़ने के लिए अधिक समय के लिए गर्म और नमी युक्त मौसम का होना आवश्यक है, साथ ही गन्ने के लिए अधिक बारिश का होना भी आवश्यक है। गन्ने की फसल की बुआई के लिए तापमान 25 डिग्री से 30 डिग्री सेंटीग्रेट होना बेहतर रहता है।  गन्ने की फसल की बुवाई के लिए अक्टूबर से नवंबर का महीना उपयुक्त रहता है, लेकिन फरवरी से मार्च के महीने में भी गन्ने की खेती की जा सकती है। गन्ने की फसल से अधिक वजन पाने के लिए 20 से 25 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान सर्वोत्तम रहता हैं।

अगर आप भी  वैज्ञानिक तरीके से गन्ने की खेती करने के बारे में सोच रहे है तो आपके लिए यह लेख आप ही के लिए है। भारत में गन्ने की खेती काफी बड़े स्तर पर की जाती है।

भारत सरकार भी गन्ने की न्यूनतम बिक्री मूल्य में समय समय पर बढ़ोतरी करती रहती है ताकि किसान भाइयों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त हो सके। गन्ने की फसल की पैदावार कम लागत में करने के लिए खेत की तैयारी करना, जलवायु और खाद देने के समय के बारे में विस्तृत जानकारियां पढ़ने के लिए आगे पढ़ते रहें!

गन्ने की खेती इस प्रकार करे 

यदि आपके पास 1 एकड़ या उससे अधिक खेती योग्य जमीन है तो आप गन्ने की खेती से अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। गन्ने को उगाना काफी आसान है और अच्छी पैदावार के द्वारा इससे अच्छा लाभ भी प्राप्त होता है

भूमि और खेत का चुनाव इस प्रकार करे 
गन्ने की खेती के लिए कृषि विशेषज्ञ और वैज्ञानिक गहरी दोमट मिट्टी को सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं। गन्ना उगाने के लिए आपको जुताई 40 सेमी से 60 सेंटी मीटर करनी चाहिए क्योंकि गन्ने की 75% जड़ें इसी गहराई पर पायी जाती हैं। खेती की शुरुआत करने पर आपको सबसे पहले खेत की जुताई कर जमीं को भुरभुरा बना लें और फिर उस पर पाटा चला कर उसे एक सरीखा समतल कर लें। खेत में जुटे से पहले 10-15 टन गे के सड़े गोबर की खाद को जमीन में खेत में फैला दें यह खाद जमीन को गन्ने के लिए काफी उर्वरक बना देगी। खरपतवार गन्ना ही नहीं किसी भी फसल के लिए काफी नुकसान दायक होती है अतः उसे सही समय परहटा दें।

गन्ने की बुवाई के समय उपयुक्त जलवायु का होना  

गन्ने की फसल को अच्छे से बढ़ने के लिए अधिक समय के लिए गर्म और नमी युक्त मौसम का होना आवश्यक है, साथ ही गन्ने के लिए अधिक बारिश का होना भी आवश्यक है। गन्ने की फसल की बुआई के लिए तापमान 25 डिग्री से 30 डिग्री सेंटीग्रेट होना बेहतर रहता है।  गन्ने की फसल की बुवाई के लिए अक्टूबर से नवंबर का महीना उपयुक्त रहता है, लेकिन फरवरी से मार्च के महीने में भी गन्ने की खेती की जा सकती है। गन्ने की फसल से अधिक वजन पाने के लिए 20 से 25 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान सर्वोत्तम रहता हैं।

सिंचाई और जल के प्रबंधन 

गन्ने की खेती के लिए गर्म मौसम में 10-10 दिनों के अंतराल और सर्दी के दिनों में 20- 20 दिनों के अंतराल पर खेत की सिंचाई करनी चाहिए। फवाड़ा विधि से पानी की सिंचाई करने से गन्ने की पैदावार में बढ़ोतरी होती हैं साथ ही इससे पानी की भी बचत होती हैं। गन्ने की फसल को लगाने के बाद 10 से 15 दिनों के भीतर खेत पर बनी मिट्टी की पपड़ी को तोड़ना आवश्यक है इस बात का अवश्य ध्यान रखें। ऐसा करने पर गन्ना आसानी से अंकुरित होता है एयर खरपतवार भी कम पनपती हैं। गन्ने की फसल की कुछ लंबाई बढ़ने के बाद उसे गिरने से बचाने के लिए गुड़ाई करने के बाद गन्ने के चारों तरफ दो बार मिट्टी अवश्य डालें और गन्ने के पत्तो को आपस में बांध दें।

गन्ने की फसल में खाद का प्रयोग इस प्रकार 

गन्ने की अधिक उत्पादन के लिए प्रति हेक्टर 300 किग्रा. नाइट्रोजन (nitrogen), 80 किग्रा.  फॉस्फोरस (Phosphorus) और 60 किग्रा. पोटाश की आवश्यकता होती है । नाइट्रोजन को तीन बराबर भागों में बाँट लें। जिसमें से 100 किग्रा. अंकुरण के समय या बुवाई के 30 दिन बाद, अगले 100 किग्रा. क्रमशः बुवाई के 90 और 120 दिनों बाद खेत में दाल दें। फॉस्फोरस (Phosphorus) और 60 किग्रा. पोटाश (potash) की साडी मात्रा बुवाई के समय ही खेत में दाल दें।   की अधिक उत्पादन के लिए प्रति हेक्टर 300 किग्रा. नाइट्रोजन (nitrogen), 80 किग्रा.  फॉस्फोरस (Phosphorus) और 60 किग्रा. पोटाश की आवश्यकता होती है । नाइट्रोजन को तीन बराबर भागों में बाँट लें। जिसमें से 100 किग्रा. अंकुरण के समय या बुवाई के 30 दिन बाद, अगले 100 किग्रा. क्रमशः बुवाई के 90 और 120 दिनों बाद खेत में दाल दें। फॉस्फोरस (Phosphorus) और 60 किग्रा. पोटाश (potash) की साडी मात्रा बुवाई के समय ही खेत में दाल दें

गन्ने की फसल को कीटों और बीमारी से बचना 

गन्ने के बीजों को नमी युक्त गर्म हवा से उपचारित करने पर वे संक्रमण रहित हो जाते हैं। फसल को बिमारियों से बचाने के लिए 600 ग्राम डायथेम एम. 45 को 250 लीटर पानी के घोल में 5 से 10 मिनट तक डुबा कर रखना चाहिए। गन्ने का रस चुसने वाले कीड़ो का असर इस फसल पर काफी अधिक रहता हैं इससे फसल को बचाने के लिए इस घोल में 500 मिली (ml) मिलेथियान भी घोल में मिलाएं।

गन्ने की फसल के  टुकड़ो के रूप में खेल में लगाने से पहले उसके डंडे के सिरे को मिट्टी के तेल और कोलतार के डूबा कर उपचारित करने से गन्ने में दीमक लगने की संभावना काफी कम रह जाती हैं। 
गन्ने की फसल से जुड़े किसी भी सवाल के लिए आप नीचे दिए कमेंट बॉक्स में हमें पूछ सकते हैं।

 

 

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