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पपिते की खेती

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पपिते की खेती

पपीता की खेती करने से आपको कम खर्च में ज्यादा benefit हो सकता है। खाने में स्‍वादिष्‍ट लगने वाला फल पपीता में विटामिन ए, सी और इ पाया जाता है। पपीते में  पपेन नामक पदार्थ पाया जाता है जो अतिरिक्त चर्बी को गलाने के काम आता है। पपीता सबसे कम समय में तैयार होने वाला फल है जिसे पके तथा कच्चे दोनों रूप में प्रयोग किया जाता है। इसलिए इसकी खेती कि लोकप्रियता दिनों दिन बढ़ती जा रही है।  Read : पपिते की खेती about पपिते की खेती

मूली की खेती कैसे करे

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मूली की खेती कैसे करे

मूली वा मूलक भूमी के अन्दर पैदा होने वाली सब्ज़ी है। वस्तुतः यह एक रूपान्तिरत प्रधान जड़ है जो बीच में मोटी और दोनों सिरों की ओर क्रमशः पतली होती है। मूली पूरे विश्व में उगायी एवं खायी जाती है। मूली की अनेक प्रजातियाँ हैं जो आकार, रंग एवं पैदा होने में लगने वाले समय के आधार पर भिन्न-भिन्न होती है। कुछ प्रजातियाँ तेल उत्पादन के लिये भी उगायी जाती है। Read : मूली की खेती कैसे करे about मूली की खेती कैसे करे

गेहूं की अधिक उपज देने वाली किस्में

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अच्छी फसल लेने के लिए गेहूं की किस्मों का सही चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। विभिन्न अनुकूल क्षेत्रों में समय पर, तथा प्रतिकूल जलवायु, व भूमि की परिस्थितियों में, पक कर तैयार होने वाली, अधिक उपज देने वाली व प्रकाशन प्रभावहीन किस्में उपलब्ध हैं। उनमें से अनेक रतुआरोधी हैं। यद्यपि `कल्याण सोना' लगातार रोग ग्रहणशील बनता चला जा रहा है, लेकिन तब भी समय पर बुआई और सूखे वाले क्षेत्रों में जहां कि रतुआ नहीं लगता, अच्छी प्रकार उगाया जाता है। अब `सोनालिका' आमतौर पर रतुआ से मुक्त है और उन सभी क्षेत्रों के लिए उपयोगी है, जहां किसान अल्पकालिक (अगेती) किस्म उगाना पसन्द करते हैं। द्विगुणी बौनी Read : गेहूं की अधिक उपज देने वाली किस्में about गेहूं की अधिक उपज देने वाली किस्में

बीन्स की फलियों की खेती इस प्रकार

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बीन्स यानी फलियां लेगुमिनेसी परिवार से संबंध रखती है और अपने हरे फलियों के लिए देश भर में उपजाई जाने वाली सब्जी की एक बहुत महत्वपूर्ण फसल है। फलियों के पौधे में उपर चढ़ने की प्रवृत्ति भी पाई जाती है। भारत में इन फलियों का इस्तेमाल रोजमर्रा की सब्जियों में, मवेशियों के चारे के तौर पर और मिट्टी में सुधार के लिए भी किया जाता है। हरी फलियों की खेती उनके पूरी तरह पकने से पहले बीन्स के फली में रहते हुए की जाती है। यह दूसरी फली वाली सब्जियों के मुकाबले ज्यादा पोष्टिक होते हैं, यही वजह है कि स्थानीय बाजार में इनकी बहुत अच्छी मांग होती है। इस आलेख में भारत में होनेवाली फली (बीन्स) और फ्रेंच बीन्स के Read : बीन्स की फलियों की खेती इस प्रकार about बीन्स की फलियों की खेती इस प्रकार

मक्का की खेती की अधिक उपज अधिक आमदनी हेतु तकनीक

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 विश्व के अनेक देशो  में मक्का की खेती प्रचलित है जिनमें क्षेत्रफल एवं उत्पादन के हिसाब से संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, चीन और  ब्राजील का विश्व में क्रमशः प्रथम, द्वितिय एवं तृतीय स्थान है । पिछले कुछ वर्षो  में मक्का उत्पादन के  क्षेत्र में भारत ने नये कीर्तिमान स्थापित किये है जिससे वर्ष 2010-11 में मक्का का उत्पादन 217.26 लाख टन के  उच्च स्तर पर पहुंच गया है मक्का को  विशेष रूप से गरीबो  का मुख्य भोजन माना जाता था परन्तु अब ऐसा नही है । वर्तमान में इसका उपयोग मानव आहार (24 %) के  अलावा कुक्कुट आहार (44 % ),पशु आहार (16 % ), स्टार्च (14 % ), शराब (1 %) और  बीज (1 %) के  रूप Read : मक्का की खेती की अधिक उपज अधिक आमदनी हेतु तकनीक about मक्का की खेती की अधिक उपज अधिक आमदनी हेतु तकनीक

मटर की खेती का सही समय

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दिल्ली: मटर की अगेती प्रजातियों की सब्जियों के रूप में हर साल बड़ी मांग है, जिसको देखते हुए रबी सीजन की मुख्य दलहनी फसल मटर की अगेती प्रजातियों को सितंबर में बुवाई के लिए विकसित किया गया है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक बिजेन्द्र सिंह ने बताया '' दलहनी सब्जियों में मटर लोगों की पहली पसंद है, इससे जहां भोजन में प्रोटीन की जरूरत पूरी होती है वहीं इसकी खेती से भूमि की उर्वरा शक्ति में पर्याप्त वृद्धि होती है। किसान कम अवधि में तैयार होने वाली मटर की प्रजातियों की बुवाई सितंबर से अंतिम सप्ताह से लेकर अक्टूबर के मध्य तक कर सकते हैं Read : मटर की खेती का सही समय about मटर की खेती का सही समय

मौसंबी की उन्नत खेती के उन्नत तरीके

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 देश मे मुख्य रूप महाराष्ट्र मे बडे पैमाने पर इस फसल का उत्पादन किया जाता है। जिसमें अहमद नगर, पुणे , जलगाॅव, जालना, औरंगाबाद, नागपुर, अमरावती जिले अग्रणी है। इसके अतिरीक्त मध्यप्रदेश मे छिंदवाड़ा जिले मे सौसर एवं पांढुरना तहसील मे इसका उत्पादन लिया जाता है। इसके अतिरीक्त आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, पंजाब, हरियाना राज्यो मे मौसंबी की खेती की जाती है।

मौसंबी के लिए जमीन किस प्रकार किहोनी चाहिए

सामान्य काली, 2 फिट तक गहरी वालुकामय जमीन मौसंबी के लिए उत्तम होती है। जमीन का पी. एच. मान 6.5 से 7.5 होना चाहिए।  Read : मौसंबी की उन्नत खेती के उन्नत तरीके about मौसंबी की उन्नत खेती के उन्नत तरीके

गाजर की खेती

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इसकी फसल को लगभग हर प्रकार की भूमि में उगाया जाता है लेकिन सबसे उपयुक्त बलुई दोमट भूमि होती है । मिट्‌टी उपजाऊ हो तथा जल-निकास का उचित प्रबन्ध हो | गाजर ठन्डे मौसम की फसल है | पाला सहन करने की  क्षमता रखती है । 15-20 डी० से० तापमान वृद्धि के लिए अच्छा रहता है । लेकिन अधिक तापमान से स्वाद बदल जाता है |

गाजर की खेती के लिए खेत की तैयारी  Read : गाजर की खेती about गाजर की खेती

स्ट्राबेरी की खेती करे बिना मिटटी

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स्ट्राबेरी : तकनीक को स्वाईल लेस कल्टीवेशन याने बिना माटी के खेती कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने इसे हाइड्रोपोनिक्स यानी जलकृषि नाम दिया है। इसमें मिट्टी का प्रयोग नहीं होता है।  पौधों को  ंपाईप के माध्यम से उगाया जाता है पौधो की साईज एवं प्रजाति के अनुसार पाईप का चयन किया जाता है तथा एक निश्चित दुरी पर इनमें गोल छेंद बनाकर जाली नुमा कप में पौधो को रखा जाता है तथा सभी पाईप को एक दूसरे से नलियों के माध्यम से जोड़ा जाता है तथा इनमें पानी को बहाया जाता है।  परंतु सिर्फ पानी बहाने से पौधे नहीं उगते, बल्कि अन्य इंतजाम करने होते हैं। इसमें पौधों के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्वों का Read : स्ट्राबेरी की खेती करे बिना मिटटी about स्ट्राबेरी की खेती करे बिना मिटटी

करेले की खेती करने का सही तरीका

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हमारे देश में करेला की खेती काफी समय से होती आ रही है । इसका ग्रीष्मकालीन सब्जियों में महत्वपूर्ण स्थान है । पौष्टिकता एवं अपने औषधीय गुणों के कारण यह काफी लोकप्रिय है । आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के अनुसार मधुमेह के रोगियों के लिये करेला की सब्जी का सेवन लाभदायक रहता है । इसके फलों से सब्जी बनाई जाती है । इसके छोटे-छोटे टुकड़े करके धूप में सुखाकर रख लिया जाता हैं, जिनका बाद में बेमौसम की सब्जी के रूप में भी उपयोग किया जाता है ।

करेला की खेती के लिये जलवायु Read : करेले की खेती करने का सही तरीका about करेले की खेती करने का सही तरीका

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