मशरूम की खेती बनी फायदे का सौदा

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किसान मशरूम की खेती कर कम लागत में लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं। इस वक्त जिले में आठ बडे़ फार्म मशरूम की खेती कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सही जानकारी हो तो किसान थोड़ी सी जगह में लाखों रुपए का मुनाफा ले सकते हैं। बागवानी विभाग भी मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए शिविर लगाकर किसानाें को प्रशिक्षित करता है। मशरूम की खेती करने वाले किसानों का भी कहना है कि थोडे़ समय में मशरुम की खेती से सब्जियों के मुकाबले ज्यादा फायदा होता है।पांच साल से मशरूम की खेती कर रहे आसन निवासी मनोज का कहना है कि उन्होंने अधिकतर सब्जियों की खेती करके देख ली है, लेकिन जो फायदा मशरूम की खेती में है वह किसी अन्य फसल में नहीं है। 
ऐसे होती है मशरूम की खेती
मशरूम की खेती करने में सबसे पहले शैड बनाए जाते हैं और उन्हें पूरी तरह से बंद रखा जाता है। इन शैडों में दो फुट लंबी व तीन फुट चौड़ी प्लेट रखी जाती है। एक प्लेट में चार से पंाच किलो मशरूम की पैदावार की जा सकती है। प्लेट के हिसाब से जगह तैयार की जाती है। इसके लिए किसी पुराने मकान में या छप्पर डालकर शैड तैयार किए जा सकते हैं, जो बिल्कुल बंद होते हैं। मशरूम की बिजाई के लिए गेहूं के भूसे को सड़ाकर उसकी काम्पेक्ट खाद बनाई जाती है जो प्लेटों में भरकर शैड के अंदर रखी जाती है। उसमें एक सप्ताह तक कार्बन डाईऑक्साइड गैस तैयार हो जाती है। बाद में इसे निकाल कर उसमें मशरूम का बीज (सपान) डाला जाता है। शैड का तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस रखा जाता है और बिजाई के बाद रोजाना फव्वारों से पानी का छिड़काव किया जाता है। 
जिला उद्यान विभाग के अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि मशरूम की खेती का अनुकूलन समय सितंबर व अक्तूबर माह होता है। इस दौरान कम्पेक्ट तैयार कर सपान की बिजाई कर दी जाती है और यह खेती तीन से चार माह में तैयार हो जाती है। 

कई बीमारियों में लाभदायक है मशरूम
मशरूम सब्जी ही नहीं बल्कि कई बीमारियों की रामबाण दवा भी साबित होती है। मेडिसन के वरिष्ठ डाक्टक हरीश शर्मा का कहना है कि मशरूम में प्रोटीन सबसे अधिक होता है और इसमें शूगर की मात्रा बिल्कुल नहीं होती। दिल व शूगर के मरीजों के लिए यह फायदेमंद है।

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