किन्नू की खेती

उत्तर भारत में नीम्बूवर्गीय फलों में किन्नू की खेती प्रमुख है | इसकी खेती हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व हिमाचल प्रदेश में की जाती है | किन्नू स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है | इसमें विटामिन सी के आलावा विटामिन ए, बी तथा खनिज तत्व भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं | किन्नू अधिक उत्पादन देने वाली नींबू वर्गीय फलों की संकर किस्म है | इसका रस खून बढ़ने , हड्डियों की मजबूती तथा पाचन में लाभकारी होता है | इसमें खटास व मिठास का अच्छा संतुलन होता है | फल जनवरी में पकता है | इसका उत्पादन 80-100 क्विंटल प्रति एकड़ है | पौधे तैयार करना : पौधे लगाने का समय : गड्ढों में लगायें पौधे : उर्वरकों का उचित इस्तेमाल : कटाई - छंटाई : फलों को गिरने से बचाएं : कीड़े व उनसे बचाव : कैसे करें उपचार :

 

अच्छी आमदनी के चलते पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसान किन्नू के रकबे में बढ़ोतरी कर रहे हैं। इन राज्यों के अद्र्ध-शुष्क जलवायु क्षेत्रों में किन्नू का रकबा बढ़ रहा है। दक्षिणी राज्यों में किन्नू के फलते-फूलते बाजार से उत्तरी राज्यों के किसानों को इसका रकबा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिला है। अनुमानों के मुताबिक इन तीनों राज्यों में किन्नू का रकबा करीब 4,000 हेक्टेयर है।

 

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कपास और गेहूं की खेती करने वाले किसान भी अच्छी आमदनी की वजह से किन्नू की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। किन्नू का रकबा हर साल पंजाब में 2,200 एकड़, हरियाणा में 1,100 एकड़ और राजस्थान में 700 एकड़ बढ़ रहा है। किन्नू के पेड़ों पर हर दूसरे साल फल लगते हैं, इसलिए चालू वर्ष ऑफ सीजन है। इस वजह से फल लगने की अवस्था वाले नए पौधों की संख्या में इजाफा होने के बावजूद उत्पादन पिछले साल से थोड़ा कम रह सकता है।

 

किसानों ने कहा कि पंजाब में कृषि शिक्षा की बेहतर व्यवस्था होने से उन्हें किन्नू का रकबा बढ़ाने में मदद मिली  है।  कम उत्पादन की वजह से पिछले साल की तुलना में किन्नू के दाम 10 फीसदी बढ़ सकते हैं। दक्षिण में खट्टे फलों की बड़ी मांग होती है। संतरा सितंबर माह तक उपलब्ध होता है। इसके बाद दो महीने तक माल्टा उपलब्ध रहता है। माल्टा का सीजन खत्म होने के बाद इसकी भरपाई किन्नू से होती है, जिसकी आवक दिसंबर में शुरू होती है और यह फरवरी तक उपलब्ध रहता है।

 

पंजाब के किन्नू उत्पादक क्षेत्रों (अबोहर, फाजिल्का और होशियारपुर) और हरियाणा के (सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी और झज्जर) के किसानों ने 3-4 वर्षों पहले आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के बाजार में अपनी उपज बेचनी शुरू की थी और अब वे अच्छा पैसा कमा रहे हैं।  पंजाब में बागवानी निदेशक और किन्नू के नोडल अधिकारी गुरकंवल सिंह सरोठा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि राज्य सरकार इस साल सिट्रस प्लांट को पूरी क्षमता पर चलाएगी, जिसमें छोटे आकार के किन्नू की खपत होगी। इससे बाजार में आपूर्ति कम पहुंचेगी, जिससे कीमतें बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के विविधिकरण मिशन के तहत किन्नू के रकबे में बढ़ोतरी पर जोर दिया जा रहा है। पंजाब में किन्नू की उत्पादकता 22 टन प्रति हेक्टेयर है।

 

हरियाणा में बागवानी विभाग के महानिदेशक अर्जन सिंह सैनी ने कहा कि किन्नू हरियाणा में पैदा होने वाला सबसे बड़ा रसदार फल है। इस फसल को धान की तुलना में कम सिंचाई की जरूरत होती है और आमदनी प्रति हेक्टेयर में 1 से 2 लाख रुपये तक होती है, जो कृषि प्रबंधन पर निर्भर करता है। इस वजह से किसान खाद्यान्न के साथ ही किन्नू उत्पादन में भी आगे आ रहे हैं। खुदरा बाजारों में किन्नू 60 रुपये प्रति किलोग्राम बिकता है, जबकि किसानों को प्रति किलोग्राम के 8-10 रुपये मिलते हैं। इस वजह से प्रगतिशील किसानों ने अपनी उपज की सीधा विपणन करना शुरू कर दिया है। पंजाब के होशियारपुर के ऐसे ही एक किसान दीपक पुरी ने बताया कि छोटे किसान भी समूह बनाकर और राज्य सरकार की मदद से कारोबारियों तक सीधे पहुंचकर ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।

 

सहोटा ने बताया कि पंजाब सरकार उपभोक्ताओं की जागरूकता के लिए एक अभियान शुरू करने के बारे में विचार कर रही है। उन्होंने कहा, 'हमने इस साल दिसंबर में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिये लक्षित ग्राहकों तक पहुंच बनाने की योजना बनाई है। हम उनसे स्वास्थ्य फायदों के लिए ज्यादा किन्नू के सेवन की अपील करेंगे। इससे आखिरकार किसानों को फायदा होगा।' किन्नू की उत्पादकता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत 'उत्कृष्टता केंद्र' स्थापित किए हैं।

 

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