खेती

उन्नत तरीके से करे गन्ने की खेती

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 भारत में गन्ने की खेती काफी बड़े स्तर पर की जाती है। इस लेख में आप जानेंगे कि किस तरह कम लागत में गन्ने की खेती कर आप अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।गन्ने की फसल को अच्छे से बढ़ने के लिए अधिक समय के लिए गर्म और नमी युक्त मौसम का होना आवश्यक है, साथ ही गन्ने के लिए अधिक बारिश का होना भी आवश्यक है। गन्ने की फसल की बुआई के लिए तापमान 25 डिग्री से 30 डिग्री सेंटीग्रेट होना बेहतर रहता है।  गन्ने की फसल की बुवाई के लिए अक्टूबर से नवंबर का महीना उपयुक्त रहता है, लेकिन फरवरी से मार्च के महीने में भी गन्ने की खेती की जा सकती है। गन्ने की फसल से अधिक वजन पाने के लिए 20 से 2 Read : उन्नत तरीके से करे गन्ने की खेती about उन्नत तरीके से करे गन्ने की खेती

आलू की खेती की उन्‍नत विधि

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आलू की खेती की उन्‍नत विधि

आलू भारत की सबसे महत्‍वपूर्ण फसल है। तमिलनाडु एवं केरल को छोडकर आलू सारे देश में उगाया जाता है। भारत में आलू की औसत उपज 152 क्विंटल प्रति हैक्‍टेयर है जो विश्‍व औसत से काफी कम है। अन्‍य फसलों की तरह आलू की अच्‍छी पैदावार के लिए उन्‍नत किस्‍मों के रोग रहित बीजो की उपलब्‍धता बहुत आवश्‍यक है। इसके अलावा उर्वरकों का उपयोग, सिंचाई की व्‍यवस्‍था, तथा रोग नियंत्रण के लिए दवा के प्रयोग का भी उपज पर गहरा प्रभाव पडता है।

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टमाटर की पौध तैयार करना

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टमाटर की पौध तैयार करना

पौध तैयार करने के लिये जमीन की सतह से 15 से 20 सेन्टी मीटर ऊचाई की क्यारी बनाकर इसमे बीज की बुवाई करते है। बीज की बुवाई करते समय बीज को मिट्टी मे ढेड से दो सेन्टीमीटर गहराई मे लगाते है तथा पक्तियों में बुवाई करते है। बीज की बुवाई के बाद क्यारी की ऊपरी सतह पर सडी हुई गोबर की खाद की पतली परत डालते है। तेज धूप, बरसात व ठंड से बचाने के लिए घास फूस से क्यारी को ढक देते है।  पूर्ण रूप से बीज अंकुरित हो जाने पर घास फूस हटा देना चाहिये।

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अति महत्त्वपूर्ण जानकारी::-

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पौधे भी इंसानों की तरह विकास करने के लिए पोषक तत्व का उपयोग करते हैं ,पौधों को अपनी वृद्धि, प्रजनन, तथा विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए कुछ पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है । इन पोषक तत्वों के उपलब्ध न होने पर पौधों की वृद्धि रूक जाती है यदि ये पोषक तत्व एक निश्चित समय तक न मिलें तो पौधों की मृत्यु हो जाती है । हालाकी पौधेभूमि से जल तथा खनिज-लवण शोषित करके वायु से कार्बनडाई-आक्साइड प्राप्त करके सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में अपने लिए भोजन का निर्माण करते हैं। पौधों को 17 तत्वों की आवश्यकता होती है जिनके बिना पौधे की वृद्धि-विकास तथा प्रजनन आदि क्रियाएं सम्भव नहीं हैं।
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ड्रेगन फ्रूट से होने वाले स्वास्थ्य लाभ

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ड्रेगन फ्रूट की खेती

आम तौर पर ड्रेगन फ्रूट थाइलैंड, वियतनाम, इज़रायल और श्रीलंका में लोकप्रिय है। बाजार में 200 रु से 250 रु तक दाम मिलने की वजह से हाल के दिनों में भारत में भी इसकी खेती का प्रचलन बढ़ा है। कम वर्षा वाले क्षेत्र इसकी खेती के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। ड्रेगन फ्रूट के पौधे का उपयोग सजावटी पौधे के साथ साथ ड्रेगन फ्रूट उपजाने के लिए होता है। ड्रेगन फ्रूट को ताजे फल के तौर पर खा सकते हैं साथ ही इस फल से जैम, आइस क्रीम, जैली, जूस और वाइन भी बना सकते हैं। सौंदर्य प्रसाधन के तौर पर भी इसे फेस पैक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। Read : ड्रेगन फ्रूट से होने वाले स्वास्थ्य लाभ about ड्रेगन फ्रूट से होने वाले स्वास्थ्य लाभ

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