एलोवेरा

एलोवेरा की खेती भी किसानों को लाभ देती

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एलोवेरा की खेती भी किसानों को लाभ देती

ग्वारपाठा, घृतकुमारी या एलोवेरा जिसका वानस्पतिक नाम एलोवेरा बारबन्डसिस हैं तथा लिलिऐसी परिवार का सदस्य है। इसका उत्पत्ति स्थान उत्तरी अफ्रीका माना जाता है। एलोवेरा को विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है, हिन्दी में ग्वारपाठा, घृतकुमारी, घीकुंवार, संस्कृत में कुमारी, अंग्रेजी में एलोय कहा जाता है। एलोवेरा में कई औषधीय गुण पाये जाते हैं, जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों के उपचार में आयुर्वेदिक एंव युनानी पद्धति में प्रयोग किया जाता है जैसे पेट के कीड़ों, पेट दर्द, वात विकार, चर्म रोग, जलने पर, नेत्र रोग, चेहरे की चमक बढ़ाने वाली त्वचा क्रीम, शेम्पू एवं सौन्दर्य प्रसाधन तथा सामान्य Read : एलोवेरा की खेती भी किसानों को लाभ देती about एलोवेरा की खेती भी किसानों को लाभ देती

एलोविरा की खेती केसे

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एलोविरा की उत्त्पति का स्थान उत्तरी अफ्रीका माना जाता है।इसे कई नामो से जाना जाता है। जैसे घृतकुमारी, ग्वारपाटा, अग्रेजी में एलॉय नाम से भी जाना जाता है। ग्वारपाटा के पोधे की ऊचाई 60- 90 से.मी.तक होती है। पत्तो की लम्बाई 30-45 सेमी. तक होती है। पत्ते 4.5सेमी से 7.5सेमी तक होते है। जड़ से उपर सतह के साथ ही पत्ते निकलने लगते है। पत्तो का रंग हरा होता है। और पत्तो की किनारों पर छोटे छोटे काटे जैसे होते है। अलग अलग रोगों के हिसाब से इसकी कई सारी प्रजातिया है।

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